अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ नीति के तहत, 2 अप्रैल से अमेरिका उन देशों के सामानों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा, जितना वे देश अमेरिकी सामानों पर लगाते हैं। इस नीति का भारत के कृषि क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।अमेरिका लंबे समय से भारत पर अपने कृषि क्षेत्र को व्यापार के लिए खोलने का दबाव बना रहा है। अमेरिका भारत को एक बड़े बाजार के रूप में देखता है, जो कभी खाद्यान्न की कमी से जूझता था और अब अनाज से लेकर फल तक निर्यात कर रहा है।
भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और बागवानी और मुर्गी पालन में भी तेजी से वृद्धि हुई है। भारत विश्व का आठवां सबसे बड़ा कृषि उत्पाद निर्यातक है।हालांकि, भारत उत्पादकता, बुनियादी ढांचे और बाजार पहुंच के क्षेत्र में अभी भी पीछे है। भारतीय किसान औसतन एक हेक्टेयर से भी कम जमीन पर काम करते हैं, जबकि 2020 में अमेरिका में एक किसान के पास 46 हेक्टेयर से अधिक जमीन थी।भारत अपने किसानों को बचाने के लिए आयात पर 0 से 150 प्रतिशत तक टैरिफ लगाता है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के अनुसार, भारत में अमेरिकी कृषि उत्पादों पर औसत टैरिफ 37.7 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका में भारतीय कृषि उत्पादों पर यह 5.3 प्रतिशत है।भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय कृषि व्यापार 800 करोड़ रुपये का है, और दोनों देश एक व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका अब भारत के कृषि क्षेत्र को खोलने का दबाव बढ़ाएगा।विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में भारत को अपनी कृषि को आधुनिक बनाना होगा, लेकिन इस ‘अमेरिकी चुनौती’ का सामना कैसे किया जाएगा, यह एक बड़ा सवाल है। क्या भारत के किसान इस ‘कृषि युद्ध’ में अपनी जमीन बचा पाएंगे? क्या ‘अन्नदाता’ की मेहनत पर ‘विदेशी ग्रहण’ लगेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।”#America #india #traiff #agriculture